एसयूवी (SUV) का क्रेज: क्यों भारतीय परिवार सेडान छोड़कर एसयूवी के दीवाने हो रहे हैं?
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के इतिहास में यह दौर सबसे दिलचस्प है। एक समय था जब 'लग्जरी' का मतलब लंबी सेडान कारें हुआ करती थीं। लेकिन आज, चाहे वह एंट्री-लेवल हैचबैक खरीदार हो या प्रीमियम लग्जरी ग्राहक, सबकी जुबान पर एक ही नाम है—एसयूवी (SUV)।
बिक्री के आंकड़े भी यही कहानी बयां करते हैं। भारत में बिकने वाली हर दो कारों में से एक कार अब एसयूवी या कॉम्पैक्ट एसयूवी होती है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारतीयों का मोह सेडान से भंग हो गया? आइए जानते हैं इसके पीछे के मुख्य कारण।
1. भारतीय सड़कें और ग्राउंड क्लीयरेंस
भारत में एसयूवी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा व्यावहारिक कारण हमारी सड़कें हैं। कई शहरों में सड़कों की हालत, मानसून के दौरान जलभराव और अनचाहे स्पीड ब्रेकर ड्राइवरों के लिए मुसीबत बनते हैं।
एसयूवी का 'हाई ग्राउंड क्लीयरेंस' (High Ground Clearance) ड्राइवरों को आत्मविश्वास देता है। आप बिना नीचे टकराए खराब रास्तों से गुजर सकते हैं। सेडान कारों में अक्सर चेसिस के नीचे टकराने का डर बना रहता है, जिसे एसयूवी पूरी तरह खत्म कर देती है।
2. 'रोड प्रेजेंस' और ऊंची सीटिंग
भारतीय मानसिकता में कार सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि रूतबे का प्रतीक है। एसयूवी का ऊंचा कद, मस्कुलर डिजाइन और चौड़े टायर सड़क पर एक अलग ही 'रोड प्रेजेंस' बनाते हैं।
- कमांडिंग व्यू: एसयूवी में ड्राइवर ऊंची सीट पर बैठता है, जिससे सड़क का नजारा बेहतर दिखता है और ट्रैफिक में गाड़ी चलाना आसान हो जाता है।
- सुरक्षा का अहसास: भारी और बड़ी बॉडी के कारण यात्रियों को एक मनोवैज्ञानिक सुरक्षा का अहसास होता है।
3. स्पेस और व्यावहारिकता (Practicality)
संयुक्त भारतीय परिवारों के लिए स्पेस बहुत मायने रखता है। आधुनिक एसयूवी न केवल केबिन में ज्यादा जगह देती हैं, बल्कि बूट स्पेस (डिग्गी) में भी लचीलापन प्रदान करती हैं। 60:40 स्प्लिट सीट्स और फोल्डेबल सीट्स की सुविधा के कारण आप ज्यादा सामान ले जा सकते हैं।
अब 7-सीटर एसयूवी भी बहुत किफायती दामों में उपलब्ध हैं, जो बड़े परिवारों के लिए हैचबैक या सेडान के मुकाबले कहीं बेहतर विकल्प साबित हो रही हैं।
4. कॉम्पैक्ट एसयूवी (Compact SUV) का उदय
टाटा नेक्सन, मारुति ब्रेजा और हुंडई वेन्यू जैसी गाड़ियों ने खेल बदल दिया है। ये गाड़ियां कीमत में एक प्रीमियम हैचबैक या सेडान के बराबर हैं, लेकिन फीचर्स और फील एसयूवी वाला देती हैं। इसने बजट खरीदारों को भी एसयूवी सेगमेंट में प्रवेश करने का मौका दिया है।
5. क्या सेडान का भविष्य खत्म है?
ऐसा नहीं है कि सेडान कारें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। ड्राइविंग के शौकीन लोग, जो लो-सेंटर ऑफ ग्रेविटी और कॉर्नरिंग का मजा लेना चाहते हैं, वे अभी भी सेडान पसंद करते हैं। सेडान कारें अक्सर एसयूवी के मुकाबले बेहतर माइलेज और पिछली सीट पर ज्यादा आराम (कम्फर्ट) देती हैं।
निष्कर्ष
एसयूवी का क्रेज कोई बुलबुला नहीं है, बल्कि यह भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। जब तक भारतीय सड़कों की स्थिति और बड़े परिवारों की जरूरतें बनी रहेंगी, एसयूवी बाजार पर राज करती रहेगी। अगर आप एक ऐसी कार चाहते हैं जो शहर के गड्ढों और हाइवे की रफ्तार दोनों को संभाल सके, तो एसयूवी निस्संदेह बेहतर विकल्प है।
























Comments (0)
No comments yet. Be the first!
Leave a Reply